स्वागतम 2014
*******अलविदा 2013 ******** बहुत से यादें हैं तुमसे वो अपने साथ रखेंगे बहुत हम मुस्कुराए थे वो लम्हें यद् रखेंगे…
*******अलविदा 2013 ******** बहुत से यादें हैं तुमसे वो अपने साथ रखेंगे बहुत हम मुस्कुराए थे वो लम्हें यद् रखेंगे…
ये गजल नहीं हैं दोस्तों मेरे इश्क का गुब्बार है , शब्दों की तो समझ नहीं और शायराना है है !! गजब किया उसने …
तुम इल्जाम लगाने लगे हर बात पे जबसे , मेरा ऐतबार खुद पे हिं तार तार हुआ !! जब हुई नम ऑंखें मुस्कुराने की कोशिस…
पूछते हो हमसे क्या खुद से पूछ कर देखो , गुजर जाता है हर बुरा वक़्त सब्र कर देखो , हाँ ये बात और है कुछ लम्हें ठहर जाते…