क्यू लगाया था इल्जाम हमने तुमपर,

पूछते हो हमसे क्या खुद से पूछ कर देखो ,
गुजर जाता है हर बुरा वक़्त सब्र कर देखो ,
हाँ ये बात और है कुछ लम्हें ठहर जातें हैं,
आगे क्या होता है थोड़ा चल कर देखो ,

क्यू लगाया था इल्जाम हमने तुमपर,
पहले तुम भी मेरे तरह तड़प कर देखो,
कुछ बाकि हो अगर कहने सुनाने को,
आओ फिर से मेरे साथ चल केर देखो,

मुझे तो जाना है तेरे महफ़िल से 
रोकना चाहो तो एक आरजू करके देखो,
हम ठहर जाएँगे जमी और अस्मा के बिच ,
जब भी चाहो बस एक अर्ज कर देखो,

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