ये आरजू हीं रही हमको भी चाहे कोई ,
कभी तन्हाई में नयनों से बुलाए कोई !!
गर हवा तेज चले और बिखर जाऊं मैं,
मुझे पलकों से चुन चुन के उठाए कोई !!
मैं फरिस्ता तो नहीं गलतियाँ तो मुमकिन है,
पहले सिकायत करे फिर सिने से लगे कोई !!
पहले सिकायत करे फिर सिने से लगे कोई !!
जब कभी गर्दिशे हालत से हौसला हरु,
हर दफा ख्वाब नया मुझको दिखाए कोई !!
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गजल
